PM E-DRIVE Scheme Update: क्या इलेक्ट्रिक स्कूटर पर सब्सिडी बंद हो जाएगी? जानें मंत्रालयों के बीच फंसा पेच और नया बजट गणित


PM E-DRIVE Scheme Update: क्या इलेक्ट्रिक स्कूटर पर सब्सिडी बंद हो जाएगी? जानें मंत्रालयों के बीच फंसा पेच और नया बजट गणित

यूपी आज लाइव डेस्क।  Electric Vehicle Subsidy India: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की सबसे बड़ी योजना PM E-DRIVE को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। भारी उद्योग मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच सब्सिडी की समयसीमा और बजट आवंटन को लेकर मंथन जारी है। इस स्थिति ने उन ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है जो भविष्य में इलेक्ट्रिक स्कूटर (e2W) या इलेक्ट्रिक ऑटो (e3W) खरीदने की योजना बना रहे हैं।

आइए समझते हैं कि सब्सिडी को लेकर वर्तमान स्थिति क्या है और मार्च 2026 के बाद आपके लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना कितना महंगा हो सकता है।

क्या है पीएम ई-ड्राइव योजना और सब्सिडी का पेच?

पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना की शुरुआत 29 सितंबर 2024 को 10,900 करोड़ रुपये के विशाल बजट के साथ की गई थी। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य देश में प्रदूषण कम करना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सुलभ बनाना है।

समयसीमा का संकट: हाल ही में सरकार ने इस योजना की कुल अवधि को बढ़ाकर मार्च 2028 तक तो कर दिया है, लेकिन यहाँ एक तकनीकी पेंच है। इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए रियायती दरों (Subsidy) की मंजूरी फिलहाल केवल 31 मार्च 2026 तक ही सीमित है। सब्सिडी को 2028 तक जारी रखने के लिए वित्त मंत्रालय से अलग से हरी झंडी मिलना अनिवार्य है।

बजट का गणित: कितनी सब्सिडी खर्च हो चुकी है?

सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो इलेक्ट्रिक वाहनों की भारी मांग के कारण बजट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो चुका है:

इलेक्ट्रिक दोपहिया (e2W): इस श्रेणी के लिए निर्धारित 1,772 करोड़ रुपये के बजट में से लगभग 1,259.91 करोड़ रुपये पहले ही वितरित किए जा चुके हैं।

इलेक्ट्रिक तिपहिया (e3W): यहाँ 907 करोड़ रुपये के कुल आवंटन में से करीब 737.35 करोड़ रुपये का उपयोग किया जा चुका है।

तेजी से खत्म होता यह बजट संकेत दे रहा है कि यदि अतिरिक्त फंड आवंटित नहीं किया गया, तो मार्च 2026 से पहले ही सब्सिडी के नियमों में कड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

भारी वाहनों पर सरकार का बढ़ता फोकस

पीएम ई-ड्राइव योजना के विस्तार में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह देखा गया है कि सरकार अब अपना ध्यान व्यक्तिगत वाहनों (स्कूटर/कार) से हटाकर सार्वजनिक और भारी परिवहन की ओर लगा रही है। योजना के नए चरण में मुख्य फोकस इन क्षेत्रों पर है:

इलेक्ट्रिक बसें और ई-ट्रक: भारी वाहनों के विद्युतीकरण में तकनीकी चुनौतियां अधिक हैं, इसलिए सरकार यहाँ अधिक प्रोत्साहन दे रही है।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क मजबूत करने और टेस्टिंग सुविधाओं को विकसित करने पर भारी निवेश किया जा रहा है।

ई-एम्बुलेंस: आपातकालीन सेवाओं में इलेक्ट्रिक वाहनों की भागीदारी बढ़ाना।

उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?

यदि वित्त मंत्रालय सब्सिडी को मार्च 2026 के बाद बढ़ाने की मंजूरी नहीं देता है, तो इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा:

कीमतों में उछाल: सब्सिडी खत्म होने या कम होने से इलेक्ट्रिक स्कूटरों की कीमत 15,000 रुपये से 25,000 रुपये तक बढ़ सकती है।

EV एडॉप्शन में कमी: कीमतें बढ़ने से लोग दोबारा पेट्रोल वाहनों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे सरकार का 'नेट जीरो' लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।

निष्कर्ष

PM E-DRIVE योजना के तहत इलेक्ट्रिक स्कूटर और ऑटो पर सब्सिडी का भविष्य अब पूरी तरह से वित्त मंत्रालय के फैसले पर टिका है। भारी उद्योग मंत्रालय लगातार पैरवी कर रहा है कि छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों पर वित्तीय सहायता 2028 तक जारी रहे। वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यदि आप इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का मन बना रहे हैं, तो मार्च 2026 से पहले खरीदारी करना एक समझदारी भरा निर्णय हो सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख केवल सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है। लेख में दिए गए आंकड़े और तथ्य सरकारी बयानों और वर्तमान मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। सब्सिडी की उपलब्धता, समयसीमा और बजट आवंटन के संबंध में अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के अधीन है। किसी भी वाहन की खरीदारी या निवेश करने से पहले आधिकारिक सरकारी पोर्टल (भारी उद्योग मंत्रालय) पर नवीनतम दिशा-निर्देशों की जांच अवश्य करें।

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