रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का निधन, 87 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का निधन, 87 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली, एजेंसी। रेमंड समूह के पूर्व अध्यक्ष विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। उनके निधन की जानकारी समूह के वर्तमान अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की। कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार उनका अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा।

Padma Bhushan से सम्मानित थे विजयपत सिंघानिया

विजयपत सिंघानिया को वर्ष 2006 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्होंने उद्योग जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और भारतीय वस्त्र उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके नेतृत्व में Raymond Group ने राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

20 वर्षों तक संभाली Raymond Group की कमान

विजयपत सिंघानिया ने वर्ष 1980 से 2000 तक लगातार दो दशकों तक रेमंड समूह का नेतृत्व किया। इस दौरान कंपनी ने अभूतपूर्व वृद्धि हासिल की और एक भरोसेमंद ब्रांड के रूप में उभरी। उन्होंने अपने कार्यकाल में कंपनी को नई दिशा दी और इसे एक वैश्विक पहचान दिलाई। बाद में उन्होंने कंपनी की जिम्मेदारी अपने बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दी और अपनी 37 प्रतिशत हिस्सेदारी भी उन्हें हस्तांतरित कर दी।

व्यापार के साथ रोमांचक उपलब्धियों के लिए भी थे प्रसिद्ध

विजयपत सिंघानिया केवल एक सफल उद्योगपति ही नहीं थे, बल्कि एक उत्साही विमान चालक के रूप में भी जाने जाते थे। उन्होंने हॉट एयर बैलून के जरिए सबसे अधिक ऊंचाई तक पहुंचने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उनके इस साहसिक कारनामे ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। इसके अलावा उन्हें एयर कमोडोर की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया गया था।

Raymond Brand को दिलाई वैश्विक पहचान

विजयपत सिंघानिया के नेतृत्व में “द कंप्लीट मैन” अभियान ने भारतीय उपभोक्ताओं के बीच गहरी छाप छोड़ी। इस अभियान ने ब्रांड को एक अलग पहचान दी और इसे भारत से बाहर भी लोकप्रिय बनाया। उनके प्रयासों से रेमंड एक मजबूत और प्रतिष्ठित ब्रांड बनकर उभरा, जिसने भारतीय परिधान उद्योग को वैश्विक मंच पर स्थापित किया।

पारिवारिक संबंध और विवाद

विजयपत सिंघानिया और उनके बेटे गौतम सिंघानिया के बीच कुछ समय पहले पारिवारिक और कानूनी विवाद सामने आए थे। हालांकि, बाद में दोनों पक्षों ने इन मतभेदों को आपसी सहमति से सुलझा लिया था। इसके बाद परिवार और व्यवसाय दोनों में संतुलन स्थापित हुआ।

विरासत जो हमेशा प्रेरित करेगी

विजयपत सिंघानिया ने अपने जीवन में व्यापारिक उत्कृष्टता और साहसिक सोच का अद्भुत उदाहरण पेश किया। उन्होंने एक बार अपने साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने अपना जीवन पूरी ईमानदारी और जुनून के साथ जिया है। उनका निधन उद्योग जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी और भारतीय उद्योग जगत में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

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