NASA Artemis 2 Mission: 54 साल बाद चांद पर फिर कदम रखेगा इंसान, जानें नासा के इस ऐतिहासिक मिशन की पूरी तैयारी
NASA Artemis 2 Mission: 54 साल बाद चांद पर फिर कदम रखेगा इंसान, जानें नासा के इस ऐतिहासिक मिशन की पूरी तैयारी
न्यूयार्क, एजेंसी। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने और चंद्रमा पर मानवीय उपस्थिति को स्थायी बनाने की दिशा में एक बड़ा रोडमैप तैयार किया है। एजेंसी की योजना अगले कुछ वर्षों के भीतर चांद पर एक स्थायी बेस स्थापित करने की है। पिछले सप्ताह ही नासा ने आगामी एक दशक के चंद्र अभियानों का खाका पेश किया था जिसमें चंद्रमा पर आधारभूत ढांचा तैयार करने की समयसीमा का खुलासा किया गया था। यह पूरी योजना ऐसे समय में सामने आई है जब आर्टेमिस-2 मिशन की लॉन्चिंग की घड़ी बेहद करीब है। माना जा रहा है कि एक अप्रैल को सभी तकनीकी मानकों और मौसमी स्थितियों को परखने के बाद नासा चार अंतरिक्ष यात्रियों को अपने पहले मानवयुक्त चंद्र मिशन के लिए रवाना कर देगा। इस मिशन के साथ ही अमेरिका करीब 54 साल बाद एक बार फिर चंद्रमा पर इंसान भेजने की वैश्विक रेस में सबसे आगे होगा।
क्या है नासा का आर्टेमिस-2 मिशन?
नासा का आर्टेमिस-2 अभियान उनके महत्वाकांक्षी आर्टेमिस कार्यक्रम की दूसरी निर्धारित उड़ान है। वर्ष 1972 में अपोलो 17 के बाद यह पहला अवसर होगा जब कोई मानव मिशन चंद्रमा के इतने करीब पहुंचेगा। यह लगभग 10 दिनों का एक जटिल मिशन है जिसमें दुनिया के सबसे शक्तिशाली स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट और ओरायन अंतरिक्ष यान का उपयोग किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2022 में आर्टेमिस-1 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था जो कि एक मानवरहित मिशन था। उस दौरान रॉकेट और स्पेसशिप की क्षमताओं को अंतरिक्ष के कठोर वातावरण में परखा गया था। अब उसी सफलता के आधार पर आर्टेमिस-2 मानव मिशन की रूपरेखा तैयार की गई है। इस मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा का चक्कर लगाएंगे और 'फ्री-रिटर्न' ट्रैजक्टरी मार्ग का उपयोग करेंगे। इसका तकनीकी अर्थ यह है कि पृथ्वी की कक्षा छोड़ते ही यान चंद्रमा के पीछे से होकर गुजरेगा और प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण की मदद से स्वतः ही पृथ्वी की ओर वापस लौट आएगा। इस यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के उस सुदूर हिस्से (Far Side) के पार जाएंगे जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता। संभावना है कि यह दल पृथ्वी से सर्वाधिक दूरी का नया रिकॉर्ड भी कायम करेगा।
आर्टेमिस-2 मिशन के चार जांबाज अंतरिक्ष यात्री
नासा ने इस ऐतिहासिक सफर के लिए अप्रैल 2023 में ही अपने उड़ान दल का चयन कर लिया था। इस दल में तीन अंतरिक्ष यात्री नासा के हैं जबकि एक सदस्य कनाडाई स्पेस एजेंसी (सीएसए) का प्रतिनिधित्व कर रहा है। मिशन की कमान रीड वाइसमैन के हाथों में है जो अमेरिकी नौसेना के अनुभवी टेस्ट पायलट हैं। यान के पायलट के रूप में विक्टर ग्लोवर को चुना गया है जो चंद्रमा का चक्कर लगाने वाले इतिहास के पहले अश्वेत व्यक्ति बनेंगे। मिशन विशेषज्ञ के तौर पर क्रिस्टीना कॉश शामिल हैं जो एक महिला द्वारा सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष उड़ान का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं। इनके साथ ही कनाडा के जेरेमी हैनसेन भी मिशन विशेषज्ञ की भूमिका में होंगे जो चंद्रमा के करीब पहुंचने वाले पहले कनाडाई नागरिक बनेंगे। यह दल सामाजिक विविधता के लिहाज से भी इतिहास रचेगा क्योंकि पहली बार कोई महिला, अश्वेत व्यक्ति और कनाडाई नागरिक पृथ्वी की निचली कक्षा की सीमाओं को पार करेंगे।
लॉन्चिंग की तारीखों में बदलाव और नई समयसीमा
आर्टेमिस-2 मिशन की लॉन्चिंग को लेकर नासा को कई बार अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ा है। शुरुआत में इस मिशन को फरवरी 2026 में भेजने की योजना थी लेकिन रॉकेट के ईंधन परीक्षणों के दौरान आई तकनीकी बाधाओं के कारण इसे टालना पड़ा। इसके बाद मार्च के महीने में भी कई संभावित लॉन्च विंडो तय की गईं लेकिन पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिशन आगे बढ़ता गया। अब नासा ने इस ऐतिहासिक मिशन के लिए 1 अप्रैल 2026 की तारीख निर्धारित की है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से 1 अप्रैल की शाम को इसकी लॉन्चिंग संभावित है। यदि किन्हीं कारणों से इस दिन उड़ान संभव नहीं हो पाती है तो नासा ने अप्रैल माह में ही 3 से 6 अप्रैल और 30 अप्रैल को बैकअप तारीखों के तौर पर सुरक्षित रखा है।
मिशन के मुख्य चरण और वैज्ञानिक लक्ष्य
लगभग 10 दिनों की इस यात्रा में ओरायन कैप्सूल कई महत्वपूर्ण चरणों से गुजरेगा। लॉन्चिंग के बाद यान पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होगा और फिर इंजन फायर कर अपनी कक्षा को ऊपर उठाएगा। चंद्रमा की ओर चार दिनों की यात्रा शुरू करने से पहले अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए लाइफ-सपोर्ट सिस्टम की सघन जांच की जाएगी। यह यान चंद्रमा की सतह पर लैंड नहीं करेगा बल्कि सतह से लगभग 8,889 किलोमीटर ऊपर से गुजरेगा। इस दौरान चालक दल चंद्रमा के क्रेटर और प्राचीन लावा प्रवाह का विश्लेषण करेगा और उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेगा। मिशन का एक अन्य प्रमुख उद्देश्य अंतरिक्ष के मौसम और सौर ज्वालाओं की निगरानी करना भी है। वापसी के समय चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण यान को पृथ्वी की ओर धकेल देगा और अंत में ओरायन कैप्सूल की हीट शील्ड का परीक्षण करते हुए यह प्रशांत महासागर में सुरक्षित स्प्लैशडाउन करेगा।
चंद्रमा पर क्यों नहीं उतरेगा आर्टेमिस-2?
अक्सर यह सवाल उठता है कि मानव मिशन होने के बावजूद अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर कदम क्यों नहीं रखेंगे। नासा ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में इस्तेमाल हो रहा ओरायन अंतरिक्ष यान केवल गहरी अंतरिक्ष यात्रा के लिए है और इसमें चंद्रमा पर उतरने की क्षमता यानी लूनर लैंडर नहीं है। चांद पर इंसानों की लैंडिंग के लिए आवश्यक लैंडर फिलहाल विकास के चरण में है जिसे एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स तैयार कर रही है। 'स्टारशिप एचएलएस' नाम के इस लैंडर का उपयोग आर्टेमिस-3 मिशन में किया जाएगा। अतः आर्टेमिस-2 का मुख्य लक्ष्य भविष्य की लैंडिंग के लिए सभी प्रणालियों की सटीकता और अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच करना है। यह मिशन मंगल ग्रह तक मानव भेजने के दूरगामी लक्ष्य की पहली सीढ़ी साबित होगा।

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