ईरान-अमेरिका युद्ध का साया: रसोई गैस की किल्लत से गृहणियां परेशान, समय पर नहीं मिल पा रहे सिलेंडर
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के बादलों का सीधा असर अब स्थानीय स्तर पर आम आदमी की रसोई तक पहुँच गया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बाधित होने के कारण भारत में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत महसूस की जा रही है। मेरठ के विभिन्न क्षेत्रों में समय पर सिलेंडर न मिलने से गृहणियों का दैनिक बजट और दिनचर्या दोनों पटरी से उतर गए हैं। इस ज्वलंत मुद्दे पर शहर की प्रमुख महिलाओं ने अपने विचार साझा किए हैं।
सामाजिक संगठनों ने जताई आपूर्ति पर चिंता
रामबाग कॉलोनी निवासी और ‘यथार्थ के सारथी’ संस्था की अध्यक्ष जूही त्यागी का कहना है कि युद्ध की विभीषिका केवल मोर्चों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसका असर गरीब और मध्यम वर्ग के चूल्हे तक पहुँचता है। वर्तमान में रसोई गैस की किल्लत ने गृहणियों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। सिलेंडर बुक करने के कई दिनों बाद भी डिलीवरी न होना प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। सरकार को चाहिए कि वह इस वैश्विक संकट के समय में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी घर में ईंधन की कमी के कारण चूल्हा न बुझे।
कला और समाज सेवा क्षेत्र में बढ़ता आक्रोश
वरिष्ठ चित्रकार एवं समाजसेवी ममता दीक्षित ने इस विषय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि एक कलाकार के रूप में मैं समाज के हर वर्ग के दर्द को समझती हूँ। गैस की किल्लत ने न केवल आर्थिक बोझ बढ़ाया है, बल्कि महिलाओं के मानसिक तनाव में भी वृद्धि की है। जब सुबह बच्चों के स्कूल जाने का समय हो और सिलेंडर जवाब दे जाए, तो उस समय की बेबसी केवल एक मां ही समझ सकती है। ईरान-अमेरिका के बीच का तनाव हमारे लिए केवल खबर नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक समस्या बन गया है। वितरण प्रणाली में पारदर्शिता की भारी कमी नजर आ रही है।
विपक्ष ने सरकार की घेराबंदी शुरू की
महानगर कांग्रेस उपाध्यक्ष रीना शर्मा ने इस संकट के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का बहाना बनाकर आम जनता को परेशान कर रही है। जब जनता को समय पर गैस सिलेंडर ही नहीं मिल पा रहा, तो उज्ज्वला जैसी योजनाओं का क्या औचित्य? कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार पेट्रोलियम कंपनियों पर दबाव बनाए और मेरठ जैसे बड़े शहरों में गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करे। आम जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है, अब किल्लत ने उनकी कमर तोड़ दी है।
राजनीतिक गलियारों में वैकल्पिक समाधान की मांग
आम आदमी पार्टी की राजनीतिज्ञ रंजना तिवारी का मानना है कि इस संकट ने यह साबित कर दिया है कि हमें ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की सख्त जरूरत है। ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से सप्लाई रुकना एक प्रशासनिक चुनौती है, जिससे निपटने में मौजूदा सरकार विफल रही है। आम आदमी पार्टी का मानना है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग और वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाना चाहिए ताकि वीआईपी कल्चर खत्म हो और सामान्य गृहणी को बिना किसी सिफारिश के समय पर सिलेंडर मिल सके। जनता इस समय दाने-दाने के लिए नहीं, बल्कि चूल्हा जलाने के लिए संघर्ष कर रही है।

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