Meerut School Books Issue: हर साल बदल रहीं किताबें, अभिभावकों पर बढ़ रहा खर्च, फीस बढ़ने की भी आशंका

Meerut School Books Issue: हर साल बदल रहीं किताबें, अभिभावकों पर बढ़ रहा खर्च, फीस बढ़ने की भी आशंका

नए सत्र में किताबों के नाम पर मनमानी का आरोप, सिलेबस वही लेकिन प्रकाशक बदलने से बढ़ रहा आर्थिक बोझ

मेरठ, यूपी आज लाइव टीम। मेरठ में नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ जहां छात्र नई कक्षा में जाने को उत्साहित हैं, वहीं अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। स्कूलों द्वारा हर साल किताबों की नई सूची जारी किए जाने से पुरानी किताबें बेकार हो रही हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही फीस बढ़ोतरी की आशंका ने भी परेशानियां बढ़ा दी हैं।

किताबों के नाम पर बढ़ रहा खर्च

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन सिलेबस में मामूली बदलाव दिखाकर हर साल नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। किताबों के प्रकाशक बदल दिए जाते हैं, जबकि पढ़ाई का विषय और सामग्री लगभग वही रहती है। इससे पिछले सत्र की किताबें अनुपयोगी हो जाती हैं और हर साल नई खरीदनी पड़ती हैं।

मामूली बदलाव, पूरी किताब नई

जानकारों के अनुसार, कई मामलों में सिर्फ पाठों का क्रम बदल दिया जाता है या कुछ अभ्यास प्रश्नों और चित्रों में बदलाव कर दिया जाता है। इसके बावजूद पूरी किताब बदल दी जाती है। कुछ स्कूलों में एक ही समूह की अलग-अलग शाखाओं में भी इसी तरह की व्यवस्था देखने को मिल रही है।

अभिभावकों के अनुभव

शहर के कई अभिभावकों ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि एक ही कक्षा की किताबों में सामग्री लगभग समान होती है, लेकिन हर साल नए कवर और नए प्रकाशक के नाम पर उन्हें दोबारा खरीदना पड़ता है। इससे परिवार के बजट पर असर पड़ता है।

पांच साल तक किताबें न बदलने की मांग

अभिभावकों की मांग है कि स्कूलों में कम से कम पांच वर्षों तक किताबें नहीं बदली जानी चाहिए। इससे एक ही परिवार के बच्चे आपस में किताबों का उपयोग कर सकेंगे और खर्च में कमी आएगी। कई लोगों ने बताया कि पहले एक ही किताब से परिवार के कई बच्चों की पढ़ाई हो जाती थी, लेकिन अब यह संभव नहीं रह गया है।

फीस बढ़ने की आशंका से चिंता

किताबों के बढ़ते खर्च के साथ-साथ अभिभावकों को इस बात की भी चिंता सता रही है कि आने वाले समय में स्कूल फीस में भी वृद्धि हो सकती है। अभी तक कई स्कूलों की ओर से फीस बुक जारी नहीं की गई है, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।

अधिकारियों ने दिए कार्रवाई के निर्देश

मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने संबंधित जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे स्कूलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि शिकायतों पर कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कदम उठाए जाएंगे।

शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

इस पूरे मुद्दे ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर हो रही इस प्रकार की गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए, ताकि आम परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।

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