उधम सिंह के जेल से रिहा होने पर पुलिस अलर्ट: मेरठ और वेस्ट यूपी में गैंगवार की आशंका से बढ़ी चौकसी
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। पश्चिम उत्तर प्रदेश का कुख्यात माफिया और जरायम की दुनिया का बड़ा नाम उधम सिंह करीब 4 साल, 8 महीने और 5 दिन के लंबे अंतराल के बाद जेल से जमानत पर रिहा हो गया है। उन्नाव जेल से उधम सिंह की रिहाई की खबर मिलते ही मेरठ सहित पूरे वेस्ट यूपी के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पुराने आपराधिक इतिहास और प्रतिद्वंद्वी गिरोहों के साथ विवादों को देखते हुए क्षेत्र में एक बार फिर गैंगवार की आशंका गहरा गई है। इसी के चलते मेरठ और आसपास के संवेदनशील जिलों में प्रशासन ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।
योगेश भदौड़ा गैंग से रंजिश के चलते सरधना क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात
पुलिस के खुफिया तंत्र को मिले इनपुट के अनुसार, उधम सिंह की रिहाई के बाद उसके पुराने विरोधी गुट फिर से सक्रिय हो सकते हैं। विशेष रूप से योगेश भदौड़ा गैंग के साथ उधम सिंह की पुरानी और खूनी रंजिश जगजाहिर है। किसी भी संभावित टकराव या बड़ी वारदात को रोकने के लिए सरधना सर्किल के अंतर्गत आने वाले करनावल, भदौड़ा और पड़ोसी गांवों में पुलिस की गश्त तेज कर दी गई है। स्थानीय थाना पुलिस के साथ-साथ पीएसी को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है ताकि कानून व्यवस्था को बनाए रखा जा सके।
रिहाई के बाद उधम सिंह की लोकेशन को लेकर रहस्य बरकरार
हैरानी की बात यह है कि उन्नाव जेल से रिहा होने के बाद उधम सिंह अपने पैतृक गांव करनावल स्थित आवास पर नहीं पहुंचा है। पुलिस अधिकारियों को अंदेशा है कि वह अपनी पहचान छुपाने या नई रणनीति बनाने के लिए उत्तराखंड या पंजाब में कहीं शरण ले सकता है। उसकी हर गतिविधि और लोकेशन पर बारीकी से नजर रखने के लिए सर्विलांस सेल और खुफिया विभाग की टीमों को सक्रिय कर दिया गया है। पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि रिहाई के बाद वह दोबारा अपने नेटवर्क को संगठित न कर पाए।
रंगदारी और धमकी के मामले में हुई थी गिरफ्तारी
उधम सिंह के आपराधिक रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उसे 20/21 जुलाई 2021 को एक संगीन मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उसने करनावल स्थित इंडियन बैंक की शाखा में घुसकर शाखा प्रबंधक गौरव राजपूत और अन्य बैंक कर्मचारियों को सरेआम धमकाया और रंगदारी की मांग की थी। इस घटना के बाद सरूरपुर थाने में उसके खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया और 22 जुलाई को उसे सलाखों के पीछे भेज दिया गया था। सुरक्षा कारणों और जेल के भीतर से गिरोह चलाने की आशंका के मद्देनजर उसे मेरठ से उन्नाव जेल स्थानांतरित किया गया था।
संदिग्धों और करीबियों पर पुलिस की पैनी नजर
मेरठ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उधम सिंह की रिहाई के बाद उसके तमाम करीबियों, मददगारों और गिरोह के पुराने सदस्यों की गतिविधियों की निगरानी शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जेल से बाहर आने के बाद वह किन-किन लोगों के संपर्क में है और उसके भविष्य के इरादे क्या हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ बॉर्डर पर भी चेकिंग बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते टाला जा सके।

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