Meerut Cyber Fraud: 'पुलवामा हमले में तुम्हारा हाथ है', मेरठ के किसान को जेल का डर दिखाकर ठगों ने लूटे 38 लाख रुपये
महाराष्ट्र पुलिस का फर्जी अफसर बनकर डराया
पीड़ित मदनपाल द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम 11 फरवरी 2026 को शुरू हुआ जब उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद का परिचय महाराष्ट्र पुलिस मुख्यालय के उप-निरीक्षक देवेंद्र कुमार के रूप में दिया। जालसाज ने किसान पर दबाव बनाते हुए दावा किया कि पुलिस की एक रेड के दौरान आतंकियों के ठिकाने से मदनपाल का आधार कार्ड और एटीएम बरामद हुआ है। ठग ने पीड़ित को यह कहकर डरा दिया कि पुलवामा आतंकी हमले की साजिश में उनका भी नाम शामिल है और उनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं।
वीडियो कॉल पर शपथ और 'जय हिंद' का मनोवैज्ञानिक दबाव
ठगों ने किसान को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेने के लिए व्हाट्सएप पर आतंकियों की फर्जी तस्वीरें भेजीं और आरोप लगाया कि भारतीय सैनिकों की शहादत में उनका हाथ है। मदनपाल ने बताया कि आरोपी उन्हें दिन-रात वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखते थे। मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए आरोपियों ने उनसे तीन बार भारत माता की शपथ दिलाई और प्रतिदिन ऑनलाइन हाजिरी लगाने का आदेश दिया। यही नहीं, उन्हें हर कॉल रिसीव करते समय "आई एम सेफ जय हिंद सर" बोलने के लिए मजबूर किया गया। ठगों ने डराया कि यदि वे सहयोग नहीं करेंगे तो उन्हें 10 साल की जेल और 60 लाख रुपये का जुर्माना भुगतना होगा।
केस से बरी करने के नाम पर दो बार में वसूले लाखों रुपये
जालसाजों ने मदनपाल को यकीन दिलाया कि यदि वे अपनी बेगुनाही साबित करना चाहते हैं, तो उन्हें सुरक्षा राशि के तौर पर सरकारी खाते में रुपये जमा करने होंगे, जो जांच पूरी होने के बाद वापस मिल जाएंगे। खौफजदा किसान ने अपनी जमा-पूंजी बचाने के चक्कर में 13 फरवरी को एसबीआई गंज बाजार शाखा से 33 लाख रुपये और फिर 18 फरवरी को बैंक ऑफ बड़ौदा की फलावदा शाखा से 5 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए ठगों के बताए खातों में भेज दिए। जब 25 मार्च तक रकम वापस नहीं मिली और आरोपियों के फोन बंद हो गए, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने 26 मार्च को पुलिस की शरण ली।

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