यूपी पीसीएस रिजल्ट: मेरठ की बेटियों ने रचा इतिहास, ज्योति धामा और देविका कुंडू समेत कई मेधावियों ने मारी बाजी


यूपी पीसीएस रिजल्ट: मेरठ की बेटियों ने रचा इतिहास, ज्योति धामा और देविका कुंडू समेत कई मेधावियों ने मारी बाजी

मेरठ, यूपी आज लाइव। उत्तर प्रदेश सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा (यूपी पीसीएस) के घोषित परिणामों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। मेरठ जनपद की बेटियों ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे जिले को गौरवान्वित किया है। साधारण परिवेश से निकलकर प्रशासनिक सेवाओं तक पहुँचने वाली इन बेटियों की कहानी संघर्ष, धैर्य और अटूट इच्छाशक्ति की एक अद्भुत मिसाल पेश करती है।

ज्योति धामा ने हासिल की 19वीं रैंक, गांव में जश्न का माहौल

हस्तिनापुर क्षेत्र के ग्राम इकवारा की रहने वाली ज्योति धामा ने यूपी पीसीएस परीक्षा में प्रदेश भर में 19वीं रैंक प्राप्त कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। किसान जयवीर सिंह और गृहिणी गीता की पुत्री ज्योति की शुरुआती शिक्षा हस्तिनापुर के सरस्वती विद्या मंदिर में हुई। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने मवाना के एएसपीजी कॉलेज से गणित में स्नातक किया और फिर डीएलएड की पढ़ाई पूरी की। शुरुआत में शिक्षक बनने का सपना देखने वाली ज्योति ने अपनी सहेली आंचल के सुझाव पर प्रशासनिक सेवा की राह चुनी। उन्होंने कोचिंग के साथ-साथ स्वाध्याय (सेल्फ स्टडी) पर विशेष जोर दिया। उनकी इस बड़ी कामयाबी से पूरे गांव में हर्ष व्याप्त है और उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

देविका कुंडू की पहले ही प्रयास में बड़ी कामयाबी

जानीखुर्द विकास खंड के गांव ढिंडाला निवासी देविका कुंडू ने अपनी मेहनत के दम पर 114वीं रैंक प्राप्त की है और अब वह वाणिज्यिक कर अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं देंगी। देविका की यह सफलता उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो असफलताओं से जल्दी घबरा जाते हैं। इससे पहले उन्होंने तीन बार यूपीएससी की परीक्षा दी थी, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। हार मानने के बजाय उन्होंने अपनी रणनीति बदली और यूपीपीएससी पर ध्यान केंद्रित किया। पहले ही प्रयास में मिली इस जीत का श्रेय उन्होंने अपने पिता के मार्गदर्शन और माता ममता देवी के सहयोग को दिया है। खेती-किसानी से जुड़े परिवार की इस बेटी ने साबित कर दिया कि संसाधन सीमित होने पर भी कड़ी मेहनत से मंजिल पाई जा सकती है।

जिम्मेदारियों के बीच ज्योति ने हासिल किया मुकाम

सफलता की एक और प्रेरक कहानी कंकरखेड़ा निवासी ज्योति की है, जिन्होंने 114वीं रैंक हासिल कर कमर्शियल टैक्स ऑफिसर का पद सुरक्षित किया है। ज्योति की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह वर्तमान में सरधना में लेखपाल के पद पर तैनात हैं और वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों के साथ-साथ गर्भावस्था की शारीरिक चुनौतियों के बीच उन्होंने परीक्षा की तैयारी जारी रखी। चार बार की असफलता के बाद भी उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा। माइक्रोबॉयोलॉजी में एमफिल कर चुकी ज्योति का अंतिम लक्ष्य एसडीएम बनना है, जिसके लिए वह अब भी निरंतर प्रयासरत हैं।

नायब तहसीलदार के पद पर रितु सिंह और साक्षी का चयन

मेरठ की सिविल एकेडमी से जुड़ी दो और छात्राओं ने सफलता की सूची में अपना नाम दर्ज कराया है। रितु सिंह ने 196वीं रैंक हासिल कर नायब तहसीलदार बनने का गौरव प्राप्त किया है। रितु के पिता स्वदेश कुमार सेवानिवृत्त अभियोजन अधिकारी हैं, वहीं उनकी माता राजेश्वरी देवी गृहिणी हैं। रितु अब यूपीएससी की तैयारी में जुटने का संकल्प ले चुकी हैं। उनके साथ ही साक्षी ने भी 146वीं रैंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। साक्षी के पिता रवींद्र यादव एक कम्युनिटी सेंटर में वार्ड बॉय के पद पर कार्यरत हैं। इन बेटियों की सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिश्रम और सही दिशा में किए गए प्रयास कभी निष्फल नहीं जाते।

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