यूपी राजनीति: मायावती ने की बड़ी बैठक, कहा- महंगाई और बेरोजगारी से जनता त्रस्त, अब बसपा ही विकल्प
लखनऊ, एजेंसी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित बहुजन समाज पार्टी के मुख्य कार्यालय में मंगलवार को पार्टी सुप्रीमो मायावती ने प्रदेश और जिला स्तर के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावशाली बनाना तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करना था। मायावती ने संगठन की आर्थिक स्थिति, जनाधार विस्तार की प्रगति और चुनावी तैयारियों की विस्तृत रिपोर्ट लेते हुए साफ किया कि कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
सरकारी नीतियों से जनता में बढ़ी निराशा, बसपा की ओर टिकी उम्मीदें
बैठक को संबोधित करते हुए मायावती ने वर्तमान सरकारों की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनकल्याण के कार्यों के प्रति शासन की उदासीनता के कारण आम आदमी त्रस्त महसूस कर रहा है। ऐसी विषम परिस्थितियों में प्रदेश की जनता की उम्मीदें अब केवल बहुजन समाज पार्टी से बढ़ गई हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया कि वे पूरी निष्ठा और लगन के साथ जनता के बीच जाएं और उनकी समस्याओं के समाधान हेतु संघर्ष करें। मायावती ने विशेष रूप से बढ़ती बेरोजगारी और रोजी-रोटी के संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारें केवल लोक-लुभावन वादों और जुमलेबाजी तक सीमित रह गई हैं, जिससे बुनियादी समस्याएं और अधिक विकराल रूप धारण कर रही हैं।
मुट्ठी भर लोगों तक सीमित विकास पर उठाए सवाल
बसपा प्रमुख ने देश की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि क्या केवल निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) पर अत्यधिक निर्भर रहकर भारत वास्तव में आत्मनिर्भर बन सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने के बजाय केवल कुछ प्रभावशाली सत्ताधारी लोगों तक ही सीमित रहेगा, तो आम जनता का वास्तविक उत्थान संभव नहीं है। मायावती ने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता को केवल एक आकर्षक नारे तक सीमित न रखकर उसे धरातल पर उतारना आवश्यक है, ताकि देश की विशाल आबादी को इसका लाभ मिल सके।
वैश्विक तनाव और बढ़ती महंगाई पर केंद्र को दी चेतावनी
इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के हालातों का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर भारत के रसोई बजट पर पड़ा है। इसकी वजह से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस समेत अन्य पेट्रोलियम उत्पाद लगातार महंगे हो रहे हैं, जिससे रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई की सबसे ज्यादा मार गरीब और मेहनतकश वर्ग पर पड़ रही है। केंद्र सरकार को समय रहते ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि देश को नोटबंदी या कोरोना काल जैसी आर्थिक तबाही का पुनः सामना न करना पड़े।
महिला आरक्षण और कमजोर वर्गों के अधिकारों की वकालत
संवैधानिक अधिकारों की चर्चा करते हुए मायावती ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यदि आरक्षण के भीतर कमजोर और पिछड़े वर्गों की महिलाओं को अलग से कोटा नहीं मिलता है, तो उनका वास्तविक सशक्तिकरण और विकास अधूरा ही रहेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से इस संवेदनशील विषय पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की अपील की ताकि समाज के सभी वर्गों को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिल सके।

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