Sports Goods Export India: 10 वर्षों में 8.1 अरब डॉलर निर्यात का लक्ष्य, 54 लाख रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
Sports Goods Export India: 10 वर्षों में 8.1 अरब डॉलर निर्यात का लक्ष्य
नीति आयोग की रिपोर्ट में रोडमैप तैयार, एमएसएमई क्लस्टर और तकनीकी निवेश से बढ़ेगा खेल उद्योग
नई दिल्ली, एजेंसी। देश में खेलों के बढ़ते क्रेज और मजबूत हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते खेल उपकरण उद्योग में बड़ा उछाल आने की संभावना जताई गई है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले 10 वर्षों में भारत से खेल उपकरणों का निर्यात 8.1 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस क्षेत्र के विस्तार से करीब 54 लाख नए रोजगार के अवसर भी सृजित हो सकते हैं।
एमएसएमई क्लस्टर से मिलेगा बढ़ावा
रिपोर्ट के मुताबिक, खेल उपकरण निर्माण को बढ़ाने के लिए एमएसएमई आधारित क्लस्टरों का विकास जरूरी होगा। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को मजबूती मिलेगी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। इसके साथ ही भारत वैश्विक स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले खेल उपकरणों के विश्वसनीय सप्लायर के रूप में उभर सकता है।
तकनीक और गुणवत्ता पर होगा फोकस
निर्यात लक्ष्य हासिल करने के लिए आधुनिक तकनीक को अपनाना, गुणवत्ता परीक्षण में सुधार और बेहतर कच्चे माल का उपयोग जरूरी बताया गया है। उन्नत सामग्रियों में निवेश और मजबूत ब्रांड साझेदारियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान बनाई जा सकती है।
वैश्विक खेल आयोजनों से बढ़ेगी मांग
आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की भरमार रहने वाली है, जिससे खेल उपकरणों की मांग में तेजी आने की उम्मीद है। Olympic Games, Commonwealth Games और Asian Games जैसे बड़े आयोजन इस मांग को और बढ़ाएंगे।
भारत भी भविष्य में इन आयोजनों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है, जिससे घरेलू उद्योग को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है।
इन राज्यों की होगी अहम भूमिका
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अभियान को आगे बढ़ाने में कई राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इनमें गुजरात, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु अग्रणी माने गए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, कर्नाटक और हरियाणा भी इस क्षेत्र में योगदान दे सकते हैं।
भारत बन सकता है ग्लोबल सप्लायर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुझाए गए उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो भारत खेल उपकरण निर्माण और निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बना सकता है। इससे न केवल अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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