Supreme Court Verdict on Dowry Case: सामान्य आरोपों पर ससुराल पक्ष को नहीं घसीटा जा सकता, SC की सख्त टिप्पणी


Supreme Court Verdict on Dowry Case: सामान्य आरोपों पर ससुराल पक्ष को नहीं घसीटा जा सकता, SC की सख्त टिप्पणी


सुप्रीम कोर्ट ने कहा—ठोस साक्ष्य के बिना रिश्तेदारों को आरोपी बनाना गलत, यूपी के मामले में FIR रद्द

नई दिल्ली, एजेंसी। दहेज उत्पीड़न से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर पति के रिश्तेदारों को आपराधिक मामलों में शामिल नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश से जुड़े एक मामले में सास, ससुर और ननद के खिलाफ दर्ज आपराधिक केस को निरस्त कर दिया और कहा कि कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

किन जजों की बेंच ने की सुनवाई

इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने की। यह याचिका Allahabad High Court के उस फैसले के खिलाफ दाखिल की गई थी, जिसमें एफआईआर रद्द करने से इनकार किया गया था। महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए, 323 और दहेज निषेध कानून के तहत मामला दर्ज कराया था। आरोप था कि शादी के बाद उससे लाखों रुपये और कार की मांग की गई, साथ ही शारीरिक उत्पीड़न का भी आरोप लगाया गया।

कोर्ट ने जांच में क्या पाया

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि लगाए गए आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं तथा उनके समर्थन में ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। मेडिकल रिकॉर्ड में भी गंभीर आरोपों की पुष्टि नहीं हुई, जिससे केस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए। अदालत ने यह भी कहा कि ससुराल पक्ष की भूमिका स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई।

कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि शिकायत दर्ज कराने में छह साल से अधिक की देरी हुई। अदालत के अनुसार, इतनी लंबी देरी से साक्ष्य कमजोर हो जाते हैं और मामले की सच्चाई सामने लाना कठिन हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज कानून का उपयोग न्याय के लिए होना चाहिए, न कि बदले की भावना से। केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है, जब तक उनके समर्थन में ठोस साक्ष्य न हों। अदालत ने एफआईआर, चार्जशीट और सभी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

इस फैसले के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि कानून का दुरुपयोग रोकना भी न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी है। साथ ही, यह निर्णय उन मामलों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में देखा जा रहा है, जहां बिना पर्याप्त साक्ष्य के रिश्तेदारों को आरोपी बनाया जाता है।

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