गाजियाबाद के हरीश राणा का हरिद्वार में अस्थि विसर्जन, 13 साल के संघर्ष के बाद अंतिम विदाई
कोमा में लंबी जंग के बाद निधन, परिवार ने गंगा तट पर नम आंखों से दी अंतिम श्रद्धांजलि
गाजियाबाद, एजेंसी।। गाजियाबाद के हरीश राणा, जिन्होंने 13 वर्षों तक जीवन और मौत के बीच संघर्ष किया, अब इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। उनके निधन के बाद परिजनों ने गुरुवार को हरिद्वार पहुंचकर गंगा तट पर विधि-विधान के साथ उनकी अस्थियों का विसर्जन किया। इस दौरान माहौल बेहद भावुक रहा और परिजनों की आंखें नम नजर आईं।
गंगा तट पर नम आंखों से दी अंतिम विदाई
हरीश राणा के पिता अशोक राणा, छोटे भाई आशीष राणा और अन्य परिवारजन सुबह अस्थियां एकत्र करने के बाद हरिद्वार के लिए रवाना हुए। गंगा किनारे धार्मिक परंपराओं के अनुसार अस्थि विसर्जन किया गया। यह क्षण परिवार के लिए अत्यंत पीड़ादायक रहा, क्योंकि इसमें वर्षों की यादें और संघर्ष समाहित थे।
पिता ने सहयोग के लिए जताया आभार
अस्थि विसर्जन के बाद भावुक हुए अशोक राणा ने कहा कि इस कठिन समय में उन्हें समाज, प्रशासन और न्याय व्यवस्था से सहयोग मिला। उन्होंने उन सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने हरीश के इलाज और न्याय की प्रक्रिया में उनका साथ दिया। उन्होंने विशेष रूप से सर्वोच्च न्यायालय, राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों का धन्यवाद किया।
आर्थिक सहायता के लिए सरकार को धन्यवाद
परिवार ने सरकार द्वारा घोषित 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता के लिए भी आभार जताया। अशोक राणा ने बताया कि इस मुश्किल दौर में पड़ोसियों, मित्रों और समाज के लोगों ने हर कदम पर परिवार का साथ दिया, जिससे उन्हें मानसिक और सामाजिक सहारा मिला।
13 साल पहले हुआ था हादसा
जानकारी के अनुसार, हरीश राणा 13 वर्ष पहले चंडीगढ़ में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। उसी दौरान एक हादसे में वह चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिसके बाद से वे लगातार कोमा में थे। लंबे समय तक इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो पाया।
इच्छामृत्यु मामले से जुड़ा रहा केस
हरीश राणा का मामला देश में इच्छामृत्यु से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में गिना गया। उनके पिता ने न्यायालय में इच्छामृत्यु की अनुमति की मांग की थी, जिसे अदालत द्वारा स्वीकार किया गया। इस मामले ने देशभर में संवेदनशील बहस को जन्म दिया था।
समाज में छोड़ गए गहरी छाप
हरीश राणा की जीवन यात्रा और उनका संघर्ष समाज के लिए एक भावनात्मक उदाहरण बन गया। उनके परिवार की दृढ़ता और न्याय के लिए की गई लड़ाई को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
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