US-Iran Tension: क्या ईरान की बढ़ती ताकत बन जाएगी डोनाल्ड ट्रंप के लिए चुनौती? अमेरिकी विशेषज्ञ का भारत को लेकर बड़ा दावा
US-Iran Tension: क्या ईरान की बढ़ती ताकत बन जाएगी डोनाल्ड ट्रंप के लिए चुनौती? अमेरिकी विशेषज्ञ का भारत को लेकर बड़ा दावा
वाशिंगटन, एजेंसी। पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति के प्रख्यात अमेरिकी विशेषज्ञ रॉबर्ट पेप ने एक चौंकाने वाला विश्लेषण प्रस्तुत किया है। पेप का दावा है कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने ईरान को दुनिया के सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली देशों की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है। उन्होंने आगाह किया कि तेल के वैश्विक बाजार पर ईरान का बढ़ता नियंत्रण और युद्ध जैसी स्थितियां न केवल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं, बल्कि इसका व्यापक असर भारत जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ना तय है।
तीन चरणों में विभाजित संघर्ष और ईरान का सामरिक प्रभुत्व
रॉबर्ट पेप के अनुसार, वर्तमान वैश्विक संघर्ष तीन निर्णायक चरणों से गुजर रहा है। उन्होंने विश्लेषण किया कि पहले चरण में अमेरिकी कार्रवाई और दूसरे चरण में ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया शामिल है, जबकि तीसरा और सबसे भयावह चरण जमीनी युद्ध की ओर बढ़ना है। विशेषज्ञ का मानना है कि वर्तमान में विश्व समुदाय पहले और दूसरे चरण के बीच के नाजुक मोड़ पर खड़ा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग पर नियंत्रण की क्षमता ने उसकी सामरिक शक्ति को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के बाधित होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
तेल महाशक्ति के रूप में उभरता ईरान और वैश्विक अर्थव्यवस्था
विशेषज्ञ का तर्क है कि बीते चार दशकों की कूटनीति जो हासिल नहीं कर सकी, वह हालिया हफ्तों के संघर्ष ने कर दिखाया है। ईरान अब वैश्विक तेल बाजार के एक बड़े हिस्से, लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। रॉबर्ट पेप ने चेतावनी दी कि यदि विश्व बाजार में तेल की उपलब्धता 100 मिलियन बैरल से घटकर 80 मिलियन बैरल रह जाती है, तो इस कमी की भरपाई करना नामुमकिन होगा। ऐसी स्थिति में अमीर देश तो ऊँची कीमतों पर ईंधन खरीद लेंगे, लेकिन विकासशील और गरीब देशों को न केवल महंगाई बल्कि ईंधन की भारी किल्लत का भी सामना करना पड़ेगा।
भारत पर प्रभाव और कूटनीतिक रणनीति 'बैंडवैगनिंग'
भारत के संदर्भ में रॉबर्ट पेप ने कहा कि ईंधन की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर खाद्य पदार्थों की महंगाई को बढ़ावा देगा। उन्होंने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि भारत अपने ऊर्जा हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए धीरे-धीरे तेहरान के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को नया आयाम दे रहा है। हालांकि भारत रणनीतिक रूप से इस पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इसे 'बैंडवैगनिंग' (शक्तिशाली के साथ जुड़ना) की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। भारत का यह झुकाव आने वाले समय में पश्चिम एशिया के समीकरणों को बदल सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप की सत्ता और भविष्य का मानवीय संकट
अमेरिकी राजनीति पर चर्चा करते हुए पेप ने कहा कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा खामियाजा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भुगतना पड़ सकता है। आंतरिक राजनीतिक दबाव और आर्थिक अस्थिरता उनकी सत्ता के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। उन्होंने अंत में चेतावनी दी कि दुनिया अभी केवल कीमतों में बढ़ोतरी देख रही है, लेकिन यदि हालात तीसरे चरण यानी जमीनी युद्ध तक पहुँचे, तो यह केवल आर्थिक संकट नहीं बल्कि एक बड़ा मानवीय संकट बन जाएगा, जिसमें ईंधन और खाद्यान्न की कमी सबसे बड़ी त्रासदी साबित होगी।

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