महिला आरक्षण: संसद में दो नए विधेयक लाने की तैयारी
नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार संसद के मौजूदा सत्र में महिला आरक्षण कानून यानी 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए दो महत्वपूर्ण नए विधेयक पेश कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार की रणनीति है कि लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन की लंबी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करने के बजाय, इस कानून को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी कदम पहले ही उठा लिए जाएं।
आम सहमति के लिए गृह मंत्री की पहल
सरकार इस ऐतिहासिक कदम पर सभी दलों को साथ लेकर चलना चाहती है। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एनडीए के सहयोगी दलों और गैर-कांग्रेसी विपक्षी नेताओं के साथ बैठकों का दौर शुरू किया है। इन मुलाकातों का मुख्य उद्देश्य विधेयकों पर व्यापक आम सहमति बनाना है। यदि स्थितियां अनुकूल रहीं, तो इसी सप्ताह ये विधेयक सदन पटल पर रखे जा सकते हैं।
816 हो सकती है लोकसभा सीटों की संख्या
चर्चा है कि प्रस्तावित नए बदलावों के तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो नए समीकरणों के अनुसार इसमें से 273 सीटें सीधे तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में महिला प्रतिनिधित्व का सबसे बड़ा आंकड़ा होगा।
विपक्ष ने रखी सर्वदलीय बैठक की शर्त
एक तरफ जहाँ सरकार तेजी दिखा रही है, वहीं विपक्षी दलों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कई विपक्षी पार्टियों ने सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि महिला आरक्षण के कार्यान्वयन और इसके बारीकियों पर चर्चा के लिए तत्काल 'सर्वदलीय बैठक' बुलाई जाए। विपक्ष का सुझाव है कि यह बैठक वर्तमान में जारी विधानसभा चुनावों के संपन्न होने के तुरंत बाद आयोजित की जानी चाहिए।
"राजनीति में महिलाओं की अधिक भागीदारी से देश की प्रगति को नई गति मिलेगी। यह एक सराहनीय कदम है।" — लवली आनंद, सांसद (जदयू)
महिला सांसदों ने जताया उत्साह
सदन की महिला सदस्यों ने सरकार की इस पहल का पुरजोर स्वागत किया है। भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'आधी आबादी' से किए गए वादे की पूर्ति बताया। उन्होंने कहा कि बीते 11 वर्षों के निरंतर प्रयास अब नीति-निर्माण में महिलाओं की सशक्त भूमिका के रूप में सामने आएंगे। वहीं, समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने भी पहल की सराहना की, हालांकि उन्होंने आरक्षण के मानदंडों और व्यवस्थाओं में स्पष्टता की जरूरत पर बल दिया।
क्या है वर्तमान कानूनी स्थिति?
ज्ञात हो कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम के माध्यम से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। सितंबर 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे अपनी स्वीकृति दी थी। हालांकि, तकनीकी रूप से इसे परिसीमन के बाद लागू होना था, लेकिन अब सरकार विशेष विधेयकों के जरिए इसे जल्द से जल्द प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।

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