मेरठ की बदलेगी सूरत: ग्रीन एनर्जी प्लांट से खत्म होंगे कूड़े के पहाड़, घरों में जलेगी कचरे से बनी गैस
मेरठ की बदलेगी सूरत: ग्रीन एनर्जी प्लांट से खत्म होंगे कूड़े के पहाड़, घरों में जलेगी कचरे से बनी गैस
मेरठ, मुख्य संवाददाता: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ में कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव शुरू होने जा रहा है। शहर में स्थापित मल्टीफीड ग्रीन एनर्जी प्लांट अब अपनी पूरी क्षमता के साथ संचालित होने की राह पर है। इस परियोजना के सफल होने से न केवल शहर को कूड़े के ढेरों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि जैविक कचरे से सीएनजी (CNG) बनाकर इसे घरेलू और व्यावसायिक उपयोग में लाया जा सकेगा।
गीले कचरे और गोबर से तैयार होगी 40 टन गैस
संयंत्र के तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्लांट पूरी क्षमता से चलने पर प्रतिदिन लगभग 40 टन गैस का उत्पादन करने में सक्षम होगा। यह मात्रा चार बड़े सीएनजी पंपों की आपूर्ति करने या करीब 20 हजार घरों की दैनिक ईंधन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इस प्रक्रिया में पशुओं के गोबर के साथ-साथ घरों से निकलने वाला गीला कचरा, सड़े हुए फल-सब्जियां और अन्य जैविक अपशिष्टों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा।
शहर को मिलेगी डंपिंग ग्राउंड के संकट से मुक्ति
विशेषज्ञों का आकलन है कि मेरठ जैसे बढ़ते शहर की स्वच्छता व्यवस्था में सुधार के लिए यह तकनीक बेहद कारगर है। यदि भविष्य में शहर के विभिन्न हिस्सों में इस तरह के करीब 50 छोटे-बड़े प्लांट स्थापित कर दिए जाएं, तो सड़कों और डंपिंग यार्डों में दिखने वाले कूड़े के पहाड़ पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे। इससे न केवल भूमि प्रदूषण कम होगा, बल्कि शहरी सौंदर्य में भी निखार आएगा।
किसानों को मिलेगी ऑर्गेनिक खाद, पर्यावरण को होगा दोहरा लाभ
गैस उत्पादन की इस प्रक्रिया का एक बड़ा लाभ सह-उत्पाद (By-product) के रूप में भी मिलेगा। प्लांट से प्रतिदिन लगभग 100 टन उच्च गुणवत्ता वाली ऑर्गेनिक खाद तैयार होगी, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होगी। पर्यावरण की दृष्टि से देखें तो, कचरे के सड़ने से निकलने वाली मीथेन गैस जो वातावरण में गर्मी बढ़ाती है, उसे अब ऊर्जा में बदल दिया जाएगा। इससे ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने में भी मदद मिलेगी।
12 डाइजेस्टर के साथ बढ़ेगी उत्पादन क्षमता
वर्तमान में प्लांट के भीतर बड़े 'डाइजेस्टर' में टेस्ट रन की प्रक्रिया चल रही है, जिससे अभी प्रतिदिन 12 टन गैस का उत्पादन हो रहा है। योजना के अनुसार, आने वाले समय में यहाँ कुल 12 विशाल डाइजेस्टर स्थापित किए जाएंगे। पूरी क्षमता के साथ संचालन शुरू होने पर यह संयंत्र न केवल मेरठ को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएगा, बल्कि स्वच्छ भारत अभियान को भी नई मजबूती देगा।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें