रूस-ईरान सहयोग के आरोपों से बढ़ी वैश्विक चिंता, यूक्रेन का बड़ा दावा
कीव, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रूस, ईरान को युद्ध से जुड़ी खुफिया जानकारी उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस संबंध में ठोस प्रमाण मौजूद हैं।
जेलेंस्की के अनुसार, इस तरह की सहायता से ईरान को संघर्ष में बने रहने में मदद मिल रही है, जिससे युद्ध लंबा खिंच सकता है और क्षेत्रीय स्थिति और जटिल हो सकती है।
बढ़ती अस्थिरता पर जताई चिंता
जेलेंस्की ने कहा कि रूसी समर्थन से ईरानी पक्ष को रणनीतिक बढ़त मिल रही है, जो स्थिति को और गंभीर बना सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ रही है और इसका असर ऊर्जा बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है।
उनके मुताबिक, कई देशों के सामने ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां गहराती जा रही हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने की बात कही।
रूस-ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क
इसी बीच, रूस और ईरान के बीच बातचीत भी जारी है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर चर्चा की।
रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजराइल की गतिविधियों के चलते बिगड़ते हालात पर विचार-विमर्श किया। साथ ही, इस संघर्ष के अन्य क्षेत्रों तक फैलने की आशंका पर भी चिंता व्यक्त की गई।
परमाणु ठिकानों को लेकर चेतावनी
रूस ने ईरान के परमाणु ढांचे पर संभावित हमलों को लेकर भी चिंता जताई है। विशेष रूप से बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसे किसी भी हमले से गंभीर पर्यावरणीय और सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकते हैं।
रूसी पक्ष का कहना है कि इन ठिकानों पर हमले न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करेंगे, बल्कि वहां मौजूद कर्मियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकते हैं।
अमेरिका-इजराइल के बीच रणनीतिक बातचीत
दूसरी ओर, इजराइल और अमेरिका के बीच भी उच्चस्तरीय संवाद जारी है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जानकारी दी कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की है।
नेतन्याहू ने कहा कि उनका देश अपने सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर कड़े कदम जारी रहेंगे।
वर्तमान हालात यह दर्शाते हैं कि क्षेत्र में तनाव अभी कम होने के आसार नहीं हैं और आने वाले समय में कूटनीतिक तथा सैन्य गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।

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