दिल्ली विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी: पीएम मोदी, सीएम और एलजी समेत कई दिग्गज निशाने पर
नई दिल्ली (एजेंसी): राजधानी दिल्ली में एक बार फिर सनसनीखेज ई-मेल के जरिए दहशत फैलाने की कोशिश की गई है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को मिले एक धमकी भरे ई-मेल में विधानसभा भवन और मेट्रो स्टेशन को बम से उड़ाने की बात कही गई है। इस मेल में न केवल विधानसभा अध्यक्ष, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर समेत कई कद्दावर नेताओं को भी निशाना बनाने की धमकी दी गई है।
मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल को भी मिली धमकी
विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस धमकी भरे संदेश में उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के नामों का भी उल्लेख है। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गईं। तत्काल प्रभाव से उत्तरी जिले के बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वाड ने विधानसभा परिसर की सघन तलाशी ली, हालांकि जांच में अब तक कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है।
सुबह के वक्त आए दो अलग-अलग ई-मेल
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, दहशत फैलाने की यह कोशिश सुबह के वक्त की गई। पहला ई-मेल सुबह 7:28 बजे विधानसभा की आधिकारिक आईडी पर आया, जबकि दूसरा मेल सुबह 7:49 बजे स्पीकर विजेंद्र गुप्ता की निजी ईमेल आईडी पर प्राप्त हुआ। घटना के बाद भाजपा विधायक हरीश खुराना ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी धमकियों से विकास कार्य नहीं रुकेंगे। उन्होंने इसे महज एक डराने की कोशिश करार दिया। वहीं विधायक अनिल गोयल ने इसे एक अफवाह बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष जताया।
'टैरो राइज 111' और धमकियों का पुराना सिलसिला
दिल्ली में विशिष्ट संस्थानों को निशाना बनाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से वीपीएन (VPN) और एन्क्रिप्टेड सर्वरों के जरिए ऐसी फर्जी धमकियां देने का चलन बढ़ा है। सितंबर 2024 में एक ही दिन में 300 से अधिक स्कूलों और हवाई अड्डों को 'टैरो राइज 111' नामक समूह द्वारा धमकी दी गई थी। इसी तरह जुलाई 2025 में भी लगभग 50 स्कूलों को मेल भेजे गए थे, जो जांच में झूठे निकले थे। साल 2026 की शुरुआत से ही लाल किला और कई स्कूलों को भी इसी तरह परेशान किया जा चुका है।
साइबर सेल की जांच: शरारत या बड़ी साजिश?
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल अब इन ई-मेल्स के मूल स्रोत (IP Address) का पता लगाने में जुटी है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए अक्सर डार्क वेब और विदेशी सर्वरों का उपयोग करते हैं। पिछली जांचों में यह भी सामने आया था कि कुछ मामलों में नाबालिग छात्रों ने स्कूल बंद करवाने के उद्देश्य से 'मजाक' में ऐसे मेल भेजे थे। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि वर्तमान धमकी के पीछे किसी पेशेवर गिरोह का हाथ है या यह भी महज एक मानसिक खुराफात है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें