मोदी-ट्रंप वार्ता: पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा, 'होर्मुज' को खुला रखने पर बनी सहमति
दिल्ली, एजेंसी। पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव और इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच उच्च स्तरीय टेलीफोनिक वार्ता हुई है। इस बातचीत का मुख्य केंद्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) रहा। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित और खुला रखना अनिवार्य है।
वैश्विक तेल आपूर्ति और होर्मुज की सुरक्षा पर मंथन
अमेरिकी राजदूत द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने पश्चिम एशिया के अस्थिर हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, वर्तमान में युद्ध के मुहाने पर है। दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने सहमति जताई कि यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है। भारत ने इस दौरान तनाव कम करने और कूटनीतिक रास्तों से शांति बहाली की आवश्यकता पर बल दिया।
श्रीलंका के साथ भी मोदी ने साझा की चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से भी इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति दिसानायके के साथ वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करने वाले व्यवधानों पर विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत-श्रीलंका ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
ट्रंप का बातचीत का दावा और ईरान का खंडन
इस कूटनीतिक हलचल के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है और दोनों पक्ष जल्द ही किसी समझौते पर पहुँच सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान की ओर से बातचीत की पहल हुई है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है और ऐसे दावे केवल तेल बाजार को प्रभावित करने के लिए किए जा रहे हैं।
पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट और आर्थिक खतरा
वर्तमान में पश्चिम एशिया एक ज्वालामुखी के ढेर पर बैठा है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के भीतर किए जा रहे हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई की चेतावनियों ने खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर पड़ेगा। यही कारण है कि भारत समेत दुनिया की बड़ी शक्तियाँ इस समय सक्रिय कूटनीति का सहारा ले रही हैं।
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