एचडीएफसी बैंक में हलचल: चेयरमैन के इस्तीफे के बाद बाहरी जांच शुरू, कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर उठे सवाल


 

एचडीएफसी बैंक में हलचल: चेयरमैन के इस्तीफे के बाद बाहरी जांच शुरू, कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर उठे सवाल

नई दिल्ली (एजेंसी): देश के सबसे बड़े निजी ऋणदाता एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) में शीर्ष स्तर पर मचे घमासान ने बैंकिंग जगत और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के विशेषज्ञों को चौंका दिया है। पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक पद छोड़ने के बाद, बैंक ने उनके इस्तीफे में उठाए गए गंभीर मुद्दों की स्वतंत्र जांच के लिए बाहरी लॉ फर्म्स की नियुक्ति की है। बैंक के इस कदम को अपनी छवि बचाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र कानूनी फर्मों की मदद

बैंक के प्रवक्ता के अनुसार, यह निर्णय पूरी तरह से 'प्रोएक्टिव' है। इसका मुख्य उद्देश्य इस्तीफे में उल्लिखित पहलुओं की एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित समीक्षा करना है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि बैंक दशकों से उच्च स्तरीय गवर्नेंस मानकों का पालन करता रहा है और यह पहल उसी परंपरा को बनाए रखने की दिशा में एक कदम है।

नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों का दिया हवाला

गौरतलब है कि 1985 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी अतनु चक्रवर्ती ने 18 मार्च से अपना पद छोड़ दिया था। 17 मार्च को लिखे अपने त्यागपत्र में उन्होंने बैंक के भीतर चल रही कुछ विशेष 'प्रथाओं और घटनाओं' पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पिछले दो वर्षों में देखी गई कुछ गतिविधियां उनके व्यक्तिगत सिद्धांतों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं, जिसके कारण उन्होंने कार्यकाल के बीच में ही हटने का फैसला किया।

बैंक के इतिहास में पहली बार ऐसा घटनाक्रम

अतनु चक्रवर्ती का यह कदम बैंक के इतिहास में अभूतपूर्व माना जा रहा है। यह पहली बार है जब किसी पार्ट-टाइम चेयरमैन ने कार्यकाल पूरा होने से पहले इस तरह के कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया है। उन्होंने अपना पत्र बैंक की 'गवर्नेंस, नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमेटी' के चेयरमैन एच. के. भनवाला को संबोधित किया था।

अनुभवी प्रशासनिक सेवा से बैंकिंग के शिखर तक

गुजरात कैडर के अधिकारी रहे चक्रवर्ती मई 2021 में बैंक के चेयरमैन बने थे। इससे पहले वे भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव और दीपम (DIPAM) सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके थे। उनके बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए बैंक ने उनका कार्यकाल मई 2027 तक के लिए बढ़ाया था, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने पद त्याग दिया।

ऐतिहासिक विलय के रहे साक्षी

चक्रवर्ती के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि एचडीएफसी लिमिटेड और एचडीएफसी बैंक का ऐतिहासिक विलय रहा, जो 1 जुलाई 2023 से प्रभावी हुआ था। इस विलय के बाद बैंक की संयुक्त बैलेंस शीट का आकार 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया था। अब विशेषज्ञ यह देख रहे हैं कि इस बड़ी संस्था के भीतर उठ रहे ये गवर्नेंस के सवाल भविष्य में निवेशकों के भरोसे को कितना प्रभावित करते हैं।

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