डीसीजीआई की बड़ी कार्रवाई: पैरासिटामोल समेत 90 दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल

 

📰 डीसीजीआई की बड़ी कार्रवाई: पैरासिटामोल समेत 90 दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल

🔹 देशभर में अप्रमाणित दवाओं के खिलाफ अभियान, राज्यों को सख्त निर्देश



नई दिल्ली, एजेंसी। दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भारत में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। Drugs Controller General of India (डीसीजीआई) ने अप्रमाणित फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के खिलाफ देशव्यापी अभियान शुरू किया है। नियामक संस्था ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को करीब 90 दवाओं की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।


⚠️ लैब जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ी

🔹 2025 के परीक्षण में कई दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं

सूत्रों के मुताबिक, हालिया लैब परीक्षणों में कई दवाओं के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन दवाओं को “नई दवा” की श्रेणी में रखा गया है, जिसके लिए केंद्रीय स्तर से अनुमति आवश्यक होती है। नियमों के अनुसार, बिना मंजूरी किसी नई दवा का निर्माण या बिक्री करना अवैध माना जाता है।


💊 इन दवाओं पर उठे सवाल

🔹 सामान्य इस्तेमाल की दवाएं भी जांच के घेरे में

जिन दवाओं के नमूने संदिग्ध पाए गए हैं, उनमें शामिल हैं:

  • Paracetamol
  • मल्टीविटामिन और फोलिक एसिड
  • सिरप और क्रीम
  • Clotrimazole
  • Betamethasone
  • Diclofenac potassium
  • Dicyclomine hydrochloride

इन दवाओं का इस्तेमाल आम तौर पर रोजमर्रा की बीमारियों में किया जाता है, जिससे मामला और गंभीर हो जाता है।


📜 राज्यों को जारी निर्देश

🔹 निर्माण से लेकर बिक्री तक सख्त निगरानी के आदेश

डीसीजीआई ने राज्यों को भेजे निर्देशों में कहा है कि:

  • अप्रमाणित दवाओं की आपूर्ति शृंखला की जांच की जाए
  • संबंधित कंपनियों और विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई हो
  • निर्माण, बिक्री और वितरण पर सख्त निगरानी रखी जाए

यह भी कहा गया है कि इस तरह की दवाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।


⚖️ कानूनी उल्लंघन का मामला

🔹 ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के नियमों का उल्लंघन

नियामक के अनुसार, यह मामला Drugs and Cosmetics Act, 1940 के उल्लंघन से जुड़ा हो सकता है। इसलिए संबंधित पक्षों के खिलाफ जांच शुरू करने और उचित कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।


📊 राज्यों से मांगी गई रिपोर्ट

🔹 त्वरित कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) अनिवार्य

नियामक ने राज्यों से कहा है कि:

  • यदि किसी कंपनी ने नई दवा के लिए आवेदन किया है, तो उसकी जानकारी साझा की जाए
  • इस पूरे मामले में त्वरित कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) भेजी जाए

🚨 निष्कर्ष: जनस्वास्थ्य पर बड़ा खतरा

यह मामला देश में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।
👉 आम लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं पर सवाल उठना, स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक बड़ा संकेत है।

सरकार ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता का मामला मानते हुए तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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