बड़ी खबर: बैंकों की ₹60,518 करोड़ की लावारिस राशि RBI फंड में ट्रांसफर


बड़ी खबर: बैंकों की 60,518 करोड़ रुपये की लावारिस राशि RBI फंड में ट्रांसफर

नई दिल्ली, एजेंसी। देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जमा एक विशाल धनराशि, जिसका कोई दावेदार सामने नहीं आया, अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास सुरक्षित कर दी गई है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को राज्यसभा में जानकारी दी कि जनवरी 2026 के अंत तक बैंकों ने कुल 60,518 करोड़ रुपये की लावारिस राशि 'जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता फंड' (DEAF) में स्थानांतरित कर दी है।

बीमा और म्यूचुअल फंड में भी फंसा है जनता का पैसा

सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, केवल बैंकों में ही नहीं बल्कि वित्तीय क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी भारी निवेश लावारिस पड़ा है। फरवरी 2026 के अंत तक बीमा कंपनियों के पास 8,973.89 करोड़ रुपये की लावारिस बीमा राशि बकाया थी। इसके अलावा, सेबी (SEBI) के नियमों के दायरे में आने वाले विभिन्न म्यूचुअल फंडों में भी 3,749.34 करोड़ रुपये की लावारिस संपत्ति दर्ज की गई है।

सही दावेदारों की पहचान के लिए कड़े कदम

सरकार और वित्तीय नियामकों ने इन लावारिस संपत्तियों के सही मालिकों या उनके उत्तराधिकारियों की पहचान करने के लिए विशेष अभियान शुरू किए हैं। वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि नियामक संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य दावा प्रक्रिया (Claim Process) को सरल, पारदर्शी और तेज बनाना है। इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और केंद्रीकृत डेटाबेस का उपयोग किया जा रहा है ताकि भविष्य में लावारिस राशियों के स्टॉक में वृद्धि को रोका जा सके और मौजूदा राशि को सही हाथों तक पहुँचाया जा सके।

सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड में निवेशकों का बढ़ता भरोसा

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सरकार ने सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (Sovereign Green Bonds) की सफलता पर भी प्रकाश डाला। वित्त वर्ष 2022-23 में शुरू होने के बाद से इन बॉन्ड्स के प्रति निवेशकों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में औसत 'बिड-कवर अनुपात' 2.32 के उच्च स्तर पर पहुँच गया है। नवंबर 2025 में हुई नीलामी के आंकड़े दर्शाते हैं कि निवेशक पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

कर प्रोत्साहन का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं

ग्रीन बॉन्ड्स में निवेशकों की बढ़ती रुचि के बावजूद, सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इन बॉन्ड्स पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त कर प्रोत्साहन (Tax Incentive) देने का कोई विचार नहीं है। सरकार का मानना है कि वर्तमान बाजार दरें और ग्रीनियम (Greenium) पहले से ही निवेशकों के लिए इस विकल्प को आकर्षक बनाए हुए हैं।

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