इच्छामृत्यु का देश में पहला मामला: 13 साल के संघर्ष के बाद हरीश राणा ने ली अंतिम विदा
नई दिल्ली: देश में संभवतः 'पैसिव यूथेनेशिया' (इच्छामृत्यु) का यह पहला मामला सामने आया है, जहाँ चिकित्सा और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन के बाद गाजियाबाद के हरीश राणा का निधन हो गया। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) में भर्ती हरीश ने 14 मार्च को एडमिट होने के 10 दिन बाद अंतिम सांस ली। एम्स के डॉक्टरों की देखरेख में उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम को धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
हादसे ने बदल दी थी जिंदगी की दिशा
हरीश राणा की यह दर्दनाक दास्तां साल 2013 में शुरू हुई थी। उस समय वह चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र थे। अगस्त 2013 में रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन से मोबाइल पर बात करते हुए वह पीजी की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए थे। इस हादसे ने एक होनहार छात्र को जीवन भर के लिए बिस्तर पर ला दिया।
'क्वाड्रिप्लेजिया' के कारण पत्थर बन गया था शरीर
हादसे के बाद हरीश को पीजीआई चंडीगढ़ और फिर दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि वह 'क्वाड्रिप्लेजिया' (Quadriplegia) से ग्रसित हो चुके हैं। इस स्थिति में मरीज के हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो जाते हैं। पिछले 13 वर्षों से हरीश इसी मूक वेदना को सह रहे थे, जहाँ उनका शरीर पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो चुका था।
कोर्ट की चौखट और कानूनी लंबी लड़ाई
बेटे के असहनीय दर्द और उसकी दयनीय स्थिति को देखते हुए माता-पिता ने 'इच्छामृत्यु' की गुहार लगाई। जुलाई 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया था, लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अंततः 11 मार्च 2026 को देश की सर्वोच्च अदालत ने हरीश की स्थिति को देखते हुए 'पैसिव यूथेनेशिया' की अनुमति प्रदान की।
एम्स में विदाई की घड़ी और डॉक्टरों का प्रयास
न्यायालय के आदेश के बाद 14 मार्च को हरीश को एम्स के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उन्हें केवल दर्द और मानसिक तकलीफ से राहत देने वाली दवाएं दी जा रही थीं। अंतिम समय में उनके पिता अशोक राणा, मां निर्मला देवी, भाई आशीष और बहन भावना समेत परिवार के करीबी सदस्य उनके साथ मौजूद थे। डॉक्टरों ने धीरे-धीरे उनके लाइफ सपोर्ट को हटाया, जिसके बाद उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से दुनिया को अलविदा कह दिया।

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